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प्रदूषण को खत्म करने की आवाज बनो और एक स्वच्छ समाज बनाओ

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बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां क्या किसी नगर या किसी भी सिटी के पास में होना सही है ? सरकार खुद कहती हैं की बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां किसी भी नगर या सिटी के पास में नहीं होनी चाहिए, तो फिर यह फैक्ट्रीया कैसे चालू है यह इसलिए चालू है की फैक्ट्री वाले बड़े आदमी हैं और सरकार को टैक्स भी ज्यादा देते हैं बिचारे गरीब आदमी चाहे मर जाए कोई चिंता नहीं है इन राजनेताओं को केवल डिबेट पर आएंगे और कहेंगे कि हम आपको मरने वालों को इतने रुपए देंगे और गरीब आदमी की बात को दबा दिया जाता है। यह सरासर अन्याय हैं। जो गुरुवार को हादसा हुआ मेरा दिल कांप गया बहुत ही दुख मय घटना घटी जिसे आज मैंने दैनिक भास्कर में सुबह पड़ी आप सब ने भी जरूर न्यूज़ देखी होगी। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की बात तो बड़े-बड़े नेता और हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी भी करते हैं। लेकिन केवल बातें बातें करते हैं ,लेकिन लागू नहीं करते इसके पीछे एक कारण हैं की बड़ी कंपनी वाले टैक्स भी अच्छा देते हैं, टैक्स के पीछे चाहे गरीब की जान जाए। इन नेता लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता।  केवल अपने को खुश करने के लिए भाषण देंगे और कहेंगे भ...

Eating meat is not an order of God

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Our struggle is to create a clean society. Please you also join us. मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं ! जो भी मांस खाते हैं उनसे रिक्वेस्ट है की मांस खाना बहुत ही बुरा है और परमात्मा के संविधान में भी नहीं लिखा है कि मांस खाओ। मांस खाना, चोरी करना, रिश्वत लेना और भ्रूण हत्या तथा बलात्कार आदि बुराइयां समाज में फैल चुकी हैं इसीलिए आज पूरा विश्व अपने पाप कर्म का दंड भोग रहा है। किसी भी सदग्रंथ के अंदर यह प्रमाण नहीं है कि मांस खाओ। पवित्र बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ 1:29) प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, माँस खाना नहीं कहा है। प्रमाण के लिए अवश्य देखें👇 https://youtu.be/r7-SBmwGsxQ परमात्मा कबीर साहेब जी अपनी अमर वाणी में कहते हैं मदिरा(शराब) पीवे कड़वा पानी, सत्तर जन्म कुत्ते के जानी।। शराब पीने से 70 जन्म तक कुत्ता बनने की सजा मिलेगी। ये खुद परमात्मा ने बताया है। आज ही त्यागें ऐसी बुरी वस्तु को। संत गरीबदास जी अपनी वाणी में कहते है- सुरापान मद्य मांसाहारी, गवन करे भोगे पर नारी। ...

शिक्षा और अंधविश्वास

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अन्धविश्वास :- बहुत ही बुरी चीज होती है क्योंकि इसकी जड़ें अज्ञानता में फैली होती हैं। यह हमारे भय, निराशा, असहायता व ज्ञान की कमी को दर्शाता है। यह बहुत ही दुखद है की बहुत से पढ़े-लिखे लोग भी अंधविश्वासों में जकड़े होते हैं। इस ज्ञान और विज्ञान के युग में यह हमारी बौद्धिक निर्धनता को दिखाता है। यह बहुत ही मूर्खतापूर्ण है की जब इंसान किसी बात को समझ नहीं पाता है तो वह उस चीज के लिए अंधविश्वासी हो जाता है। हम इन्हें दैवीय कारण समझकर डरने लगते हैं। बहुत से अंधविश्वास बहुत ही हास्यास्पद बन जाते हैं, जैसे कि  बिल्ली के रास्ता काटने से माना जाता है की कुछ बुरा होने वाला है। उल्लू की आवाज़ या भेड़िये की आवाज़ सुनकर अनहोनी की आशंका करना, यह सब  अंधविश्वास के कारण हैं। इससे यह पता चलता है की हम मानसिक स्तर पर आज भी आदिम युग में ही जी रहे हैं। कई जगहों पर तो यह भी माना जाता है की अगर घोड़े की नाल को घर के दरवाजों पर लगा दिया जाए तो वह सौभाग्य का प्रतीक होता है। इन सभी अंधविश्वासों को मानना वास्तव में हास्यास्पद है। अंधविश्वास किसी विशेष समाज या देश से नहीं जुड़े हैं बल्कि यह हर जगह पाए जात...

आज भाई को फुरसत है

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आज भाई को फुर्सत है Part 1 🖊️ एक भगत सत्संग में जाने लगा। दीक्षा ले ली, ज्ञान सुना और भक्ति करने लगा।अपने मित्र से भी सत्संग में चलने तथा भक्ति करने के लिए प्रार्थना। परंतु दोस्त नहीं माना। कह देता कि कार्य से फुर्सत नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे हैं। इनका पालन पोषण भी करना है। काम छोड़कर सत्संग में जाने लगा तो सारा धंधा चौपट हो जाएगा। वह सत्संग में जाने वाला भगत जब भी सत्संग में चलने के लिए अपने मित्र को कहता तो यही कहता कि अभी काम से फुर्सत नहीं है। 1 वर्ष पश्चात उस मित्र की मृत्यु हो गई।उसकी अर्थी उठाकर कुल के लोग तथा नगर वासी चले ,साथ साथ सैकड़ों नगर- मोहल्ले के व्यक्ति भी साथ-साथ चलें। सब बोल रहे थे कि राम नाम सत्य है, सत्य बोले गत हैं। भगत कह रहा था कि राम नाम तो सत्य है परंतु आज भाई को फुर्सत है। नगर वासी कह रहे थे कि सत्य बोले गत हैं, भगत कह रहा था कि आज बाई को फुर्सत हैं। अन्य व्यक्ति उस भगत से कहने लगे कि ऐसे मत बोल, इसके घर वाले बुरा मानेंगे। भगत ने कहा कि मैं तो ऐसे ही बोलूंगा।मैंने इस मूर्ख से हाथ जोड़कर प्रार्थना की थी कि सत्संग में चल, कुछ भक्ति कर ले। यह कहता था कि ...

नशा करता है नाश

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नशा चाहे शराब, सुल्फा ,अफीम, हीरोइन आदि आदि का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा। नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है। फिर शरीर का नाश करता है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं:-1 फेफड़े,2 लिवर,3 गुर्दे,4 हृदय। शराब सर्वप्रथम इन चारों अंगों को खराब करती हैं। सुल्फा दिमाग को पूरी तरह नष्ट करता है। हीरोइन शराब से भी अधिक शरीर को खोखला करती हैं। अफीम से शरीर कमजोर हो जाता है। अपनी कार्यशैली छोड़ देता है। अफीम से ही चार्ज होकर चलने लगता है। रक्त दूषित हो जाता है। इसीलिए इनको गांव नगर में भी नहीं रखें, घर की बात क्या। सेवन करना तो सोचना भी नहीं चाहिए। अगर आप भी नशे से परेशान हैं तो एक अनमोल पुस्तक जीने की राह जो सिर्फ पढ़ने मात्र से ही नशा छूट जाता है अगर आप नशा छोड़ना चाहते हैं तो आज ही मंगा लीजिए जीने की राह। यह पुस्तक मंगाने के लिए आप अपना पूरा नाम पता मोबाइल नंबर कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजें ताकि यह पुस्तक आपके पास पहुंचा सके। यह पुस्तक आपके पास बिलकुल फ्री पहुंचाई जाएगी । 👏 Free.... Free.... Free👏 अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं www.jagatgu...